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पूर्णागिरि

समुद्र स्तर से ऊपर 3000 मीटर की ऊंचाई पर, टनकपुर से 20 किलोमीटर दूर, पिथौरागढ़ से 171 किलोमीटर दूर  और चंपावत से 92 किमी  दूर स्थित है |  पूर्णागिरी मंदिर में पूरे देश के सभी भागों के भक्तों द्वारा यात्रा की जाती है, जो यहां बड़ी संख्या में आते हैं, विशेष रूप से मार्च-अप्रैल माह में चैत्र नवरात्रि के दौरान।

पूर्णागिरी जिसे पुण्यगिरि भी कहा जाता है से काली नदी मैदानों में उतरती है और इसे शारदा नाम से जाना जाता है। इस मंदिर की यात्रा के लिए एक वाहन द्वारा ठुलिगाड तक जाया जा सकता है। । इस जगह से ‘पुण्य पर्वत’ का दक्षिण-पश्चिमी भाग देखा जा सकता | पूर्णागिरी पहाड़ी के उच्चतम बिंदु (मंदिर) से तीर्थयात्री काली का विस्तार, उसके द्वीप, टनकपुर का टाउनशिप और कुछ नेपाली गांव देख सकते हैं। पुराने बरम  देव मंडी पूर्णिगिरी के करीब है | टनकपुर या पूर्णगिरि से यह संभव है कि हम  काली नदी पर तामली और यहां तक ​​कि झूलाघाट नेपाल तक यात्रा कर सके।

फोटो गैलरी

  • पूर्णगिरि मंदिर

कैसे पहुंचें:

बाय एयर

पूर्णागिरि से निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर है जो कि उत्तराखंड राज्य के नैनीताल जिले में 160 किमी दूर स्थित है। पंतनगर हवाई अड्डे से पूर्णागिरि तक टैक्सी उपलब्ध हैं। पंतनगर एक सप्ताह में चार उड़ान दिल्ली के लिए उपलब्ध है |

ट्रेन द्वारा

पूर्णागिरि चम्पावत से 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। टनकपुर रेलवे स्टेशन से पूर्णागिरि तक टैक्सी और बस आसानी से उपलब्ध हैं। टनकपुर लखनऊ, दिल्ली, आगरा और कोलकाता जैसे भारत के प्रमुख स्थलों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। ट्रेन टनकपुर रेलवे स्टेशन के लिए उपलब्ध होती है और पूर्णागिरि टनकपुर के साथ मोटर वाहनों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

सड़क के द्वारा

पूर्णागिरि उत्तराखंड राज्य और उत्तरी भारत के प्रमुख स्थलों के साथ मोटर वाहनों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। आईएसबीटी आनंद विहार की बसें टनकपुर, लोहाघाट और कई अन्य गंतव्यों के लिए उपलब्ध हैं, जहां से आप आसानी से स्थानीय कैब या बस तक पहुंच सकते हैं